Thursday, November 22, 2018

هؤلاء الثلاثة يمتلكون مفاتيح سوق النفط وليست العجوز "أوبك"

وذكرت وكالة "بلومبرغ" في مقال تحليلي نشرته أمس الأحد، أن قيادات ثلاثة أكبر منتجين للنفط في العالم وهم الرئيسان الروسي فلاديمير بوتين والأمريكي دونالد ترامب إلى جانب ولي العهد السعودي الأمير بن سلمان، سيؤثرون على مسار أسعار النفط في 2019 وما بعد ذلك.
وقالت الوكالة الاقتصادية إنه في الوقت الذي تكافح فيه منظمة "أوبك" لتوحيد الصف، تهيمن الولايات المتحدة وروسيا والسعودية على إنتاج النفط العالمي، حيث يتجاوز إنتاج الدول الثلاث من الذهب الأسود إنتاج 15 عضوا في "أوبك".
وأشارت إلى أن الولايات المتحدة وروسيا والسعودية تضخ النفط حاليا بمعدلات قياسية وبمقدور كل واحد منها زيادة الإنتاج في 2019، رغم أنها لا تفضل هذا الخيار.
ووفقا لبيانات "بلومبرغ" فإن إنتاج روسيا من الخام والمكثفات والغاز الطبيعي المسال يبلغ 12.3 مليون برميل يوميا، فيما يبلغ إنتاج السعودية 12.2 مليون برميل يوميا، بينما وصل إنتاج الولايات المتحدة إلى 15.2 مليون برميل يوميا.
وأضافت أن موسكو والرياض قادتا مجموعة الدول المنتجة للنفط المنضوية تحت راية "أوبك+" في يونيو الماضي لتخفيف القيود التي كانت مفروضة على إنتاج النفط منذ بداية 2017، وبعد ذلك رفع كلا البلدين إنتاجهما من الخام إلى مستويات قياسية أو قريبة منها.
في الوقت نفسه ارتفع الإنتاج الأمريكي بشكل غير متوقع، وتزامن ذلك مع إعادة الرئيس الأمريكي دونالد ترامب فرض العقوبات على صادرات النفط الإيراني ما يعد مؤشرا على احتمال حدوث عجز في معروض النفط، لكن المخاوف في أسواق النفط من ذلك تبددت مع زيادة في مخزونات النفط في الدول المتقدمة بمنظمة التعاون الاقتصادي والتنمية.
وعن تأثير هذه الدول الثلاث في سوق النفط، أشارت "بلومبرغ" إلى أن السعودية، التي تعتمد على عائدات النفط بشكل كبير، قررت خفض صادراتها بنحو
فقدت منظمة "أوبك" سيطرتها على أسوق النفط، وباتت المجريات في هذه السوق الحيوية من الاقتصاد العالمي تتحدد من قبل ثلاث شخصيات، وذلك عبر إطلاق التصريحات أو التغريدات.
500 ألف برميل في اليوم الشهر المقبل مع انخفاض أسعاره في السوق.
كما كان لتغريدات ترامب وانتقاده منظمة "أوبك" لخفض الإنتاج تأثيرا ملحوظا على الأسعار، حيث انخفضت الأسعار في كل مرة كان الرئيس الأمريكي يطلق تغريدة بهذا الشأن.
فيما رأت الوكالة أن تصريح الرئيس بوتين عن أن سعر برميل النفط عند 70 دولارا يناسب روسيا، مؤشر على أن "موسكو قد تقرر عدم تمديد خفض الإنتاج خلال اجتماع أوبك+ الشهر القادم"، لكنها ستواصل التعاون والتنسيق مع الرياض في سوق النفط في 2019.

Tuesday, November 20, 2018

تحتل السمنة المركز الثاني بين مسببات السرطان في بريطانيا بعد التدخين

ويتماشى ذلك المشروع مع هدف منظمة مكافحة سرطان الخصيتين في نيوزلندا ، برفع الوعي بهذا المرض.
ومرض سرطان الخصيتين يتمتع بنسب عالية للغاية للشفاء، لكن الأمر يعتمد تماما على مدى الكشف عنه مبكرا.
ووفقا لأرقام المنظمة الخيرية، فإن 90 في المئة من الحالات يتم شفاؤها، وإذا اكتشفت مبكرا تزيد نسبة الشفاء لتصل إلى 99 في المئة.
وتقول هيئة الخدمات الصحية الوطنية في بريطانيا إن هذا النوع من السرطان هو الأكثر انتشارا، بين الرجال في سن ما بين 15 إلى 45 عاما، لكنها تشير إلى أن سرطان الخصيتين، في حد ذاته، "واحد من أقل أنواع السرطان انتشارا".
وتضيف الهيئة: "الأعراض الشائعة للمرض هي تورم غير مؤلم، أو انتفاخ في إحدى الخصيتين، أو أي تغيير في شكل أو ملمس إحدى الخصيتين".
وتشير بيانات الهيئة البريطانية إلى أن 2200 رجل تشخص إصابتهم بسرطان الخصيتين، في بريطانيا سنويا.
لكن منظمات معنية بمكافحة السرطان تحذر من أن كثيرا من الرجال لا يقومون بإجراء الفحوصات الدورية، وغير واعين بضرورتها.
ويقول معهد أبحاث السرطان في بريطانيا إن "سرطان الخصيتين أكثر انتشارا بين الذكور البيض، مقارنة بأقرانهم من الأسيويين أو السود".
قال علماء إنهم توصلوا إلى كشف جديد قد يفسر العلاقة بين السمنة والإصابة بالسرطان.
وأوضح فريق من كلية "ترينتي دبلن" الأيرلندية أن الدهون تعطل عمل خلايا في الجسم مسؤولة عن تدمير الأنسجة السرطانية.
وتعتبر السمنة من أكبر مسببات السرطان التي يمكن التغلب عليها في بريطانيا بعد التدخين، وفقا للمركز البريطاني لأبحاث السرطان.
وأشار بحث إلى أن السمنة المفرطة يتسبب في حالة واحدة، على الأقل، من بين 20 إصابة بالسرطان في بريطانيا.
وأعرب الباحثون عن أملهم في التوصل إلى دواء يمكن الاعتماد عليه في تجديد الخلايا القاتلة للسرطان.
وقالت الأستاذة الجامعية ليديا لينش إن "مركبا يمكنه منع امتصاص الدهون لدى الخلايا القاتلة للأنسجة السرطانية قد يحقق بعض النفع".
وأضافت: "أجرينا تجربة معملية أشارت نتيجتها إلى إمكانية استعادة هذه الخلايا" قدراتها مرة ثانية.
وتابعت: "نرجح أن فقد الوزن قد يكون طريقة أفضل، وذلك لأنه صحي أكثر بصفة عامة".
وقال ليو كارلين، وهو من مركز بيتسون البريطاني لأبحاث السرطان، إنه "رغم أننا نعلم أن السمنة تكون سببا في 13 نوعا من السرطان، لا نزال غير قادرين عن فهم العلاقة بينها وبين السرطان".
وأضاف أن "هذه الدراسة تكشف كيف يمكن لجزيئات الدهون منع خلايا من أداء وظيفتها في قتل الأنسجة السرطانية، كما تمدنا الدراسة بسبل للمزيد من التجارب لعلاج جديد".

Tuesday, November 6, 2018

क्यों घबराये हुए हैं असम के 90 लाख मुसलमान

यरिंग की घटना में जिंदा बचे एकमात्र शख्स 19 साल के सहदेव नमासूद्र मौत के उस मंजर को याद कर कांप उठते है.
वो कहते है, "आम दिनों की तरह उस दिन भी मैं अविनाश के घर पर आया हुआ था. अविनाश का छोटा भाई अनंत मेरा अच्छा दोस्त था. हम सभी लोग अविनाश के घर के भीतर बनी दुकान के बाहर बैठकर मोबाइल पर गाना सुन रहे थे. तभी अचानक तीन लोग मुंह पर काला कपड़ा बांधे सेना की वर्दी में घर के अंदर आए और हमें साथ चलने को कहा. हमने सोचा सेना के लोग है तो हम उनके साथ बाहर रास्ते पर चले गए."
"बाहर जाने पर मैंने देखा कि वो छह लोग थे और उनके साथ अविनाश के चाचा और गांव का एक व्यक्ति था. उन्होंने हमसे हिंदी में बात करते हुए कहा कि थोड़ा आगे चलो तुम लोगों से बात करनी है. फिर वो हमें नाले पर बने लोहे के पुल के उस पार ले गए और सभी को कतार में बैठने के लिए कहा. वहां काफी अंधेरा था और वे आपस में असमिया भाषा में बात कर रहे थे. इस दौरान उन्होंने हमें डराया और जबरन कतार में बैठा दिया.फिर हमलावरों ने पीछे से फायरिंग की. फायरिंग के कारण वहां काफी धुआं फैल गया. मैं डर के मारे बेहोश हो गया था और पास के नाले में जा गिरा. थोड़ी देर बाद जब मुझे होश आया तो मैंने देखा सभी लोग जमींन पर गिरे हुए थे. मैं वहां से भागा और इस घटना की जानकारी गांव वालों को दी."
अपने माथे पर गोली की हल्की खरोंच दिखाते हुए सहदेव कहते है, "जब भी मेरी आंखों के सामने वो मंजर आता है, मेरा दिल कांप उठता है.कई रातों से सो नहीं पाया हूं. घर से निलकने में डर लगता है."
बंगाली मूल के लोगों पर हुए हमले को चार दिन बीत चुके है. लेकिन आसपास के इलाकों में अभियान चला रही पुलिस अभी तक एक भी हमलावर को गिरफ्तार नहीं कर पाई है.
बीशोनिमुख खेरबाड़ी गांव में मौजूद सदिया के पुलिस अधीक्षक प्रशांत सागर चांगमाई कहते है, "घटना के बाद से पुलिस अलग-अलग इलाकों में हमलावरों की तलाश में अभियान चला रही है. इस घटना के बाद धोला-सदिया पुल पर जांच के दौरान पुलिस ने वार्ता विरोधी उल्फा (आई) के एक लिंक मैन को गिरफ्तार किया है. डिकलाइन गोगोई नामक इस युवक को पुलिस ने पहले भी एक आईईडी बम के साथ गिरफ्तार किया था. फिलहाल उससे पूछताछ की जा रही है. वो पैसो के लिए उल्फा के साथ काम करता है."
नागरिकता संशोधन बिल पर राज्य में एक-दूसरे समुदाय के खिलाफ चल रही बयानबाजी के बाद क्या सरकार ने अलर्ट किया था, इस सवाल पर एसपी कहते है,"सरकार की तरफ से अलर्ट मैसेज आते रहते है और हमने उसके मुताबिक इन इलाकों में पुलिस पेट्रोलिंग की व्यवस्था की थी."
एसपी दावा कर रहे थे कि घटना वाले दिन स्थानीय थानेदार और पुलिस के जवान गांव में गश्त लगाने दो-तीन बार गए थे. लेकिन गांव वालों का आरोप है कि घटना के बाद जब थाने में फोन किया तो काफी देर तक फोन बंद आ रहा था. महज दो सौ मीटर की दूरी पर मौजूद थाने से पुलिस को मौके पर आने के लिए आधे घंटे से ज्यादा समय लग गया.
धोला थाना क्षेत्र के अंतर्गत बसे इस गांव के एक छोर में जहां पांच सौ मीटर की दूरी पर सैखुवा घाट पुलिस आउट पोस्ट है तो दूसरे छोर पर थाना है.लेकिन आश्चर्य की बात है कि हमलावरों की फायरिंग की आवाज को गांव वालों ने दिवाली के पटाखा समझा और पुलिस को वही आवाज सुनाई नहीं दी.हीं, एसपी चांगमाई कहते है,"इनसब बातों की और गांव वालों के आरोंपो की जांच हो रही है. बाद में हमारे शीर्ष अधिकारी इन सवालों का जवाब देंगे."
तिनसुकिया जिले के सदिया इलाके के आसपास वैसे तो बंगाली मूल के काफी लोग बसे हुए है लेकिन बीशोनिमुख खेरबाड़ी ही एक ऐसा गांव है जहां करीब सौ फिसदी हिंदू बंगाली लोग सालों से रह रहें है.
पुलिस इस हमले के पीछे चरमपंथी संगठन उल्फा (आई) को संदेह पर रख अपनी आगे की कार्रवाई कर रही है. जबकि प्रदेश में चारों तरफ हो रही निंदा के बाद उल्फा के परेश बरुआ गुट ने एक बयान जारी कर इस हमले में संगठन की संलिप्तता से इनकार किया है.
ऐसे में इस हमले को लेकर असम की सत्ता संभाल रही मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनोवाल की सरकार सवालों के घेरे में है. क्योंकि प्रदेश में पिछले तकरीबन एक महीने से बंगाली हिंदूओं के नागरिकता वाले मुद्दे पर असमिया-बंगाली संगठन के कुछ नेताओं के बीच तकरारभरी बयानबाजी हो रही थी.
क तरफ जहां असम के जातीय संगठन नागरिकता संशोधन बिल का लगातार विरोध कर रहे हैं वहीं बंगाली लोगों के अधिकतर संगठन इस बिल के समर्थन में है.